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Tuesday, December 15, 2009

खाओ गगन रहो मगन

हमारे प्रोफेस्सर साहब पड़ा रहे हैं की आने वाले सालों में सब काम रोबोट से होगा | रोबोट और artificial intelligence और भविष्य उससे होने वाले उत्पात का नज़ारा तो हमें श्री आर्नोल्ड शिवाजीनगर सालों पहले बता चुके हैं | यहाँ पर बात चली vacuum cleaner, lawn mower वगैरह से और पहुंची इंसानी शरीर में जगह जगह चिप घुसेड़ने की | ये सब देख के तो हमारे रोंगटे खड़े हो गए |

अब automatic vacuum cleaner रहेगा तो बाई का क्या होगा ! खैर वो सब छोडिये हमारी तो एक ही दरख्वास्त है की automatic नाई मत बनाइएगा | इस भागदौड़ के और मशीनी customer care की दुनिया में कुछ ही जगह तो बची हैं सुकून की, उन्हें बक्श दो |

एक महाशय ने वो कर डाला जिसको सुन के हमें कहना ही पड़ा की "ढाक के तीन पात" | पहले तो उन्होंने अपने ही अन्दर RFID चिप डाल ली फ़िर उससे मन न भरा तो अपनी और अपनी पत्नी की नस में एक और ऐसी चिप लगायी जिससे एक में हरकत होने से दूसरे को पता चले | अरे मियां ये सब के लिए तो हमारे हिन्दी फ़िल्म के हीरो सिर्फ़ इश्क फरमा लेते हैं और गाते हैं "जो हाल दिल का इधर हो रहा है, वो हाल दिल का उधर हो रहा है" और ये महानुभाव electronic और surgery लगा रहे हैं | खैर उनका काम वही जाने हमें तो एक ही जुमला याद आ रहा है "को काहू में मगन तो काहू में मगन"

Wednesday, October 21, 2009

नाटकीय रूपांतरण

बहुत कम ऐसा होता है जब आपके कॉलेज के अनुभव आपको पाठशाला की याद दिलाये | जिस lecture में मैं फिलहाल बैठा हुआ हूँ वो शिक्षिका पड़ा तो रही है innovation के बारे में किन्तु पड़ रही हैं एक पहले से लिखे मूलपाठ द्वारा किसी नाटक के अभिनय माफिक| यह देख कर अपने पुराने रसायन शास्त्र (chemistry) के शिक्षक की याद आ गयी जो एक guide book से पढाया करते थे | बच्चों को पता न चल जाये तो सन सत्तर के किसी अख़बार का cover लगा के आते थे | पर आप तो जानते हैं, बच्चा भगवान् का रूप होता हैं और इतने सारे भगवानों से कहाँ कुछ छुप सकता है, एक चतुर बालक ने सारी किताबे छान मारी और वो किताब खरीद कर क्लास के एक कोने में बैठ जाता| बस फिर क्या शिक्षक महाराज दनादन, line by line किताब से पढाते रहते और लड़का line by line underline करता रहता :D

Saturday, August 08, 2009

इम्तिहान की घड़ी

तो जैसा की पहले भी होता आया है आज फ़िर एक उबाऊ इम्तिहान की तैय्यारी के बीच में एक पोस्ट लिखा जाएगा| अब कोई नया विषय तो मिल नही रहा तो इम्तिहान पे ही ब्लॉग लिख देते हैं :) | हिन्दुस्तानी में जिसे इम्तिहान कहते हैं उसका अंग्रेज़ी शब्द बड़ा अच्छा है examination अर्थात आपको examine किया जा रहा है| Laboratory के किसी चूहे या मेंडक की तरह आपका test या आपके ऊपर test किया जा रहा है जिसका जानलेवा नतीजा जल्द ही पता चल जाएगा |

Exam में भी अपने देश का कोई टक्कर नही है भाई | जब इम्तिहान का मौसम आता था तो मानो यूं लगता था की पूरी कायनात का exam है, दस कमरे छोड़ के भी कोई गाना चला रहा हो तो उसे बंद करा दिया जाता था| किताबों, कॉपियों और कलम का बाज़ार गरम हो जाता था और तमाम प्रकार के टोटके लगाये जाते थे, जैसे कौन सी shirt lucky है और कौन सी कलम करामाती| जिन्होंने ने कभी मेहनत कर मटकी न फोडी वो इम्तिहान फोड़ने की बात करते थे | गणित की परीक्षा न भी हो तो भीषण गणित लगती थी, किसने assignment में कितने अंक बना लिए हैं, अव्वल दर्जा पाने के लिए कितने और की जरूरत है| मेहनत करने का कोटा तो सीमित है तो किस विषय में कितना समय ख़राब किया जाए ऐसी ही रणनीतियों और अटकलों की गर्मी हर तरफ़ देखी जा सकती थी |

पर एक महाशय मेरे कमरे के करीब ही कहीं रहते थे और रोज परीक्षा को 'फोड़ने' के बजाये परीक्षा से फूट के आते थे और फूट फूट के linkin park का एक ही गाना बजाते थे - I tried so hard and got so far. अरे मियां हमे बताने की क्या जरूरत है हम कौन सा कद्दू में तीर मार के आते थे| जिन छात्रों ने साल भर कुछ पड़ लिया होता था उनकी मांग सेंसेक्स की तरह बढ जाती थी और मुहँ छोड़ सब रातें काली करने में जुट जाते थे |

स्कूल में तो इम्तिहान का सीधा हिसाब होता था की भाई कॉपी और किताब उठाओ पहले से आखरी chapter तक अभ्यास कर लो पर college में तो अलग ही रंग देखने को मिलते थे | विषय छोड़ के लोगों प्रोफ़ेसर के चरित्र और मनोविज्ञान का विश्लेषण करते थे | कौन सा प्रोफ़ेसर किस प्रकार के सवाल देता है उसके कैसे जवाब लिखने होंगे और यदि जवाब नही आते हो तो क्या लिखना चाहिए ये सब सोचने में पड़ने का वक्त किसे मिलेगा | सबसे बढ़िया छात्र होते थे जिन्होंने जन्म तो मनुष्य योनी में लिया पर आसार काम देव के वाहन की तरह थे - अर्थात तोता| एक महानुभाव तो एक धार में ऐसा रट्टा लगाते की शब्दों सहित comma, full stop. diagram number और यहाँ तक की appendix भी घोंट के पी जाते थे |

अब इस स्विस नगरी में भी इम्तिहान हैं, laboratory ke चूहे समान परीक्षण है पर हॉस्टल वाली वो बात नही है जहाँ आपको अपने साथी चूहों को इम्तिहान फोड़ते हुए देखकर कोफ्त हो सकती थी, या बगल वाले दडबे के चूहे की हालत देख कर आप ये सोच सकते थे की चलो चूहा दौड़ में मैं इसके तो आगे हूँ | छुरी के नीचे काटना तो है ही तो साथ में कौन कौन कैसे काटने वाला है ये जान के ढाढ़स बाँध नही पाता| तो बस इस ही बात पे एक पुराना गाना याद आ गया - "तुम पुकार लो":

दिल बहल तो जाएगा इस ख्याल से
हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से

Monday, May 25, 2009

मानोगे नहीं ...

भौतिकी (physics) एक ऐसा विषय है जो हमे हमेशा से भाता रहा है | क्या आपने शाखा से गिरे सेब से विज्ञानं की नयी शाखा निकलते देखी है?! भौतिकी के दाहिने हाथ के खेल का किस्सा तो हम सुना चुके हैं, और हिंदी भाषा वाला भी | यह किस्सा कुछ और है | बात है CBSE board के इम्तिहान की जिसका कुरुक्षेत्र शहर से थोडा दूर था तो हम सब छात्र एक ही बस में जाते और आते थे | कुछ हम थे जो समीकरणों (equations) और सूत्रों (formulas) में सर फुडाते रह गए और कुछ वो थे जिन्होंने भौतिकी को भगवान् से मिला डाला ! नहीं नहीं हम श्रीमान भूरे (dan brown) के सहपाठी नहीं रहे | da vinci छोडिये ये तो angel, demon के बाप तक पहुँच गए |

इन महानुभाव का एक जुमला हुआ करता था "भाई .... तुम मानोगे नहीं ....." (अरे बंधू जब तुम्हे पता है की हम नहीं मानने वाले हैं तो बता काहे रहे हो! खैर ये बात तो किसी और मुद्दे की है...) | तो भौतिकी की परीक्षा ख़तम हुई और छात्रों का काफिला सवालों और उनके जवाबों में उलझा, मध्हम कदमों से आगे बढ ही रहा था की किसी ने उन महानुभाव से पूछ ही लिया "यार कैसी हुई तुम्हारी परीक्षा" बस फिर क्या था उन्होंने वह महान शब्द कह डाले "की आज तो यदि ब्रम्हा जी भी नीचे उतर के बोल दे की बेटा तुम पास हो गए हो तो में कहूँगा..... आप झूठ बोल रहे हैं"!

(अपने ही बनाए माटी के पुतले के इतने अटूट विश्वास को परमपिता ब्रम्हा भी कैसे झुठला सकते थे तो ....)

Sunday, May 17, 2009

हिंदी कक्षा के व्यंगात्मक वाक़ये

तो मुद्दा ये है की हमारी पाठशाला में शिक्षकों को रचनात्मकता और नवाचार भाता न था | बात है हिंदी परीक्षा की जिसमे प्रश्न आते थे वही घिसे पिटे स्त्रीलिंग से पुल्लिंग और विपरीत | तो एक महानुभाव को जब भगवान का लिंग बदलना था (तिरस्कारी और असंभव काम है जानता हूँ) तो महाशय का जवाब रहा मादा भगवान | शिक्षिका ने उस छात्र को महात्मा के खिताब से तो नवाजा पर अंक न दिए |

दूसरा वाक़या भी हिंदी कक्षा का ही है, दूसरे किस्म के घिसे पिटे सवाल आते थे दिए गए एक शब्द पे वाक्य बनाने के | अब कई ऐसे क्लिष्ट शब्द आते थे की बच्चों के हाथों से तोते उड़ जाते | मसलन एक शब्द आया विहंगम | अब विहंगम किस चिडिया का नाम है इसकी तो आधे से ज्यादा लोगों को हवा भी न थी | फिर क्या लोगों का रचनात्मकता दिमाग चल गया | एक राम बाण वाक्य निकाला गया जो सब दुःख दूर कर दे | भाई किसी भी संज्ञा का लिंग बदलने के लिए वह संज्ञा नर है की मादा इतना तो पता ही होना चाहिए पर ऐसी कोई भी बाधा इस राम बाण वाक्य में न थी | और वह महान वाक्य था "विहंगम एक अच्छा शब्द है" | कुछ छात्र तो यहाँ तक न रुके उन्होंने सवाल को ही जवाब बना डाला और स्याह अक्षरों में लिखा "शिक्षिका ने विहंगम पे वाक्य लिखने को कहा" | इस वाक्य ने तो शिक्षिका को अवाक कर दिया | अब इस बात को झुठलाया तो नहीं जा सकता की शिक्षिका ने वाक्य लिखने को कहा है, ये तो अटूट सत्य है और इस वाक्य में आवश्यक शब्द भी है तो वह शिष्य को पुरस्कार में भारत की खोज शून्य तो भेंट दे नहीं सकी हाँ कक्षा में निवेदन जरूर किया की ऐसे वाक्य लिखिए जिनसे शब्द का अर्थ उभर के आये और मन मसोस कर आधे अंक दिए|